आज समाज में व्यक्ति वैचारिक रूप से निर्धन और नैतिक रूप से दुर्बल है, इसीलिए, धन शक्तिशाली हो गया है और समाज धर्म के बल से नहीं बल्कि धन के बल से शाषित है। अगर धन सचमुच इतना आवश्यक होता तो ईश्वर पेड़ों में पत्तों के बजाये पैसे उगाते पर ऐसा इसलिए नहीं होता क्योंकि धन का सृजन ईश्वर ने नहीं बल्कि मनुष्य ने अपने जीवन को सरल बनाने के उद्देश्य से किया था पर आज दुर्भाग्यवश जीवन का संसाधन ही जीवन का उद्देश्य बन गया है और यही सामाजिक जीवन की समस्त समस्याओं का स्त्रोत है। ब्रह्मांडीय चेतना ने जैविक चेतना के रूप में शरीर को इसलिए धारण किया था ताकि हम शरीर के माध्यम से सृष्टि की सम्पूर्णता में अपने विशिष्ट योगदान से न केवल अपने पात्र की भूमिका के लिए महत्व अर्जित कर सकें बल्कि अपने प्रयास से संतुष्टि की अनुभूति को भी प्राप्त कर सकें पर जब से हमने अपने आप को ब्रह्मांडीय चेतना के अंश के बजाये यह शरीर मान लिया हमारी प्राथमिकताएं ही गलत हो गयी, तभी,जीवन के लिए सुख का महत्व संतुष्टि से अधिक है। सुख प्राप्ति में है और संतुष्टि देने में, ऐसे में, प्रश्न यह उठता है की जब इस भौतिक संसार में हमारा कुछ है ही नहीं तो हम किसी को क्या दे सकते हैं और तब संतुष्टि की प्राप्ति कैसे संभव होगी; इसी दृष्टि से जीवन के प्रयास के प्रयोजन और उनके प्रति निष्ठा और समर्पण का महत्व है। परिस्थितियों को बदलने के लिए समस्या के प्रति दृष्टिकोण को बदलना होगा और समाधान की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बनाना होगा जो केवल ज्ञान से संभव है। इसलिए किसी भी समाज में शिक्षा के माध्यम से ही व्यक्ति के विवेक के विकास की सम्भावना होती है पर अगर बाज़ारवाद के प्रभाव में शिक्षा का ही व्यावसायीकरण कर दिया जाए तो स्वाभाविक है की ऐसे समाज का भविष्य चिंता का विषय होगा। यही वर्तमान के भारत की भी समस्या है जिसका निवारण व्यवस्था के सूत्रधार द्वारा ही संभव है क्योंकि सामाजिक व्यवस्था में पदों को ही संविधान ने समस्त शक्तियां प्रदान की है और यही व्यवस्था परिवर्तन के सन्दर्भ में सामाजिक नेतृत्व के भूमिका का महत्व भी; ऐसे में, अगर कोई समाज किसी भी प्रभाव में अपने लिए योग्य नेतृत्व का चयन कर पाने में सक्षम न हो तो वह अपने नियति का दोषी स्वयं होगा।"
Wednesday, 2 August 2017
Wednesday, 26 July 2017
presdent राम नाथ कोविंद के भाषण पर कांग्रेस का हंगामा
भारत को 14 वे राष्ट्रपति के रूप में राम नाथ कोविंद मनोनीत किया गया है परंतु उनके पहले ही भाषण पर कांग्रेस ने देश के राष्ट्रपति पर सवाल उठाने शुरु कर दिया हैं कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं का कहना है कि राष्ट्रपति जी ने अपने भाषण में नेहरू जी और इंद्रा गांधी का नाम नही लिया और उन्होंने गांधी जी के साथ दिनदयाल उपाध्याय जी का नाम लिया। इससे यह लगता है कि कांग्रेस् अपने पतन की और बढ़ रही हैं। बिना सोचे समजे वो देश के सरवोच्च पद पर मनोनीत राष्ट्रपति जी का अपमान कर रहे हैं। आज तक किसी भी पार्टी ने कभी भी ऐसे सवाल किसी राष्ट्रपति पर नही उठाये परंतु कांग्रेस ने इस बात राजघाट तथा संसद में बहुत बड़ा हंगामा किया । मुझे लगता है कि कांग्रेस को यह बात रास इसलिए नही आ रही है क्योकि देश के pm भी संग से जुड़े हुए थे और राम नाथ कोविंद जी भी संग से जुड़े हुए थे दोनों ही संग से विचार धारा रखने वाले हैं और कांग्रेस को ये बात रास नही आ रही है देश का pm तथा प्रेसिडेंट दोनों ही संग से जुड़े थे । ऐसी कारण वह राष्ट्रपति जी पर आरोप लगा रहे की उन्होंने नेहरू जी का नाम अपने भाषण में नही लिया है जिन्होंने देश को आजाद करने में अपना योगदान दिया और कांग्रेस का कहना है कि दिनदयाल उपाध्याय जी तो कोई फ्रीडम फाइटर नही थे तो उनका नाम को लिया गया अब इनको कोन बतायेगा की वो महान इंसान कोन थे । अगर इनको पता नही है तो कृपा करके उनकी किताब पड़े तब आपको पता चल जायेगा को वो कोन थे और हर किसी हो अपने icon का नाम लेने का हक हैं हो सकता है दिनदयाल जी उनके आइकॉन हों । बना सोचे समजे देश के राष्ट्रपति पर ऐसी बाटे बोलना बिलकुल उचित नही ये सारी चीजे कांगेस की मानशिकता को दर्षाती हैं। जिससे आगे आने वाले चुनाओ में बहुत फर्क पड़ेगा। अगर तुम इस बात को मुद्दा बनाते हो की नेहरू जी का नाम नही लिया और दिनदयाल जी का नाम लिया तो इसको मतलब तो यही होगा की "आ बेल मुझे मार मेरे गले में फंदा डाल" वैसे तो कांगेस ने देश के लिए कुछ ज्यादा नही किया हैं जो भी किया होगा 1947 से पहले किया था क्योकि तब कांग्रेस में देश के जान देने वाले बड़े बड़े नेता हुआ करते थे । परंतु आज जब कांग्रेस जब ऐसी बातों को मुददा बनाती है तो इनको सर्म आनि चाहिए की ये लोग ही खुद अपने बड़े नेताओ का जैसे नेहरू जी और अन्य नेताओं का अपमान कर रहे हैं । इस सोच को बदलना होंगे और में आखरी में कहना चाहूंगा कि कांग्रेस को अपनी इस बड़ी गलती पर राष्ट्रपति जी से माफ़ी मागनि चाहिए। और राष्ट्रपति जी को राजनीति से दूर ही रखना चाहिए।
जय हिंद
Monday, 24 July 2017
JNU में टैंक लगाने से कुछ लोगो को परेशानी क्यों ?
JNU जिसे जवाहर लाल यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता हैं। जो की भारत के टॉप यूनिवर्सिटीयो में से एक हैं। तथा जिसका अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी बहुत बड़ा हैं। परन्तु कुछ समय से इस महाविद्यालय शिक्षा से जुड़े मामले कम तथा देश विरोधि मामले ज्यादा उजागर हो रहे हैं। एक दिन पहले jnu में जब कार्गिल शहीदों के लिए एक कार्यक्रम हुआ था तो वहाँ के VC ने भारतीय सरकार से गुजारिश की हैं कि jnu के परिसर में आर्मी का एक टैंक लगा दिया जाये। जिससे यहाँ के छात्रों में देश सम्मान तथा देशभक्ति बड़े।परतु उनके इस स्टेटमेन्ट से कई लोगो को परेशानी हो रही हैं। वो लोग नही चाहते है कि परिसर में कोई ऐसी चीज आये जिससे छात्रों में देशभक्ति बड़े तथा हमारे देश और आर्मी के लिए सम्मान बड़े। में उन लोगो सीधे - सीधे पूछना चाहता हूं कि जब jnu में देश विरोधि नारे लगाये गये थे तथा अफजल गुरु की बरषी मनायो गयी तथा बुरण वानी के नारे लगाये गए थे तब इन लोगो ने अप्पति क्यों नही उठायी आज जब वहाँ पर टैंक लगाने की बात आयी तो इन लोगो को बड़ा कष्ठ हो रहा हैं। में इन लोगो से पूछना चाहता हूं अगर देशभक्ति बढ़ाने के लिये कुछ काम किये जा रहे हैं तो इसमें गलत क्या हैं। हमे तो इस बात पे गर्व होना चाहिए की हमारे परिसर में टैंक लग रा हैं जिसे देख के हम हर वक्त अपनी सेना को याद करेंगे और उनका हौसला बढ़ाने में मद्त करेंगे। अगर इस टैंक लगाने से परिसर में पढ़ाई कम हो जायेगी तो फिर तो इसको लगाना सही नही हैं। परंतु आज तक ऐसा देखने को कही नही मिला की टैंक लगाने से पढ़ाई में कमी आयी हैं। में हालहि में पेट्रोलियम यूनवर्सिटी गया था मेने वहाँ भी टैंक लगा देखा परंतु वहाँ से आज तक ऐसी कोई रिपोर्ट नही आयी की टैंक के कारण उनकी पढ़ाई में कोई दिक्कते आयी हो। परंतु इसको देखके वहाँ के छात्रों का हौसला जरूर बढ़ता होगा तथा उनको हमारी आर्मी पर गर्व होती होगा। में उन सभी देश विरोदी लोगो को कहना चाहता हूँ की jnu एक विद्या का मंदिर है उसे मंदिर ही रहने दिया जाये वहाँ पर देश विरोधि काम करने की कोई आवश्कता नही हैं । नही तो इसके एक दिन बहुत बुरे परिणाम भी आ सकते हैं
जय हिंद।
Sunday, 23 July 2017
pok हमारा है और हम जल्द ही इसे वापस लेंगे मोदी सरकार
हम सभी जानते है कि Pok भारत का एक अभिन्न अंग है और हमेशा ही रहगे। जिसे पाकिस्तान ने जबर्दस्ती कबजाया हुआ है। यहा पर पाकिस्तान के द्वारा लोगो पर बहुत ज्यादा शोषण तथा उनकी हत्याये होती है । यहां तक की पाकिस्ता के फौज के द्वारा रेप और किडनेपिंग के भी मामले सामने आये हैं। एक साल पहले जब प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी जी ने लाल किले से कहा था कि हम pok को पाकिस्तान से आजाद करायेगे तो सभी लोगो ने इसे एक ऐतिहासिक भाषण बताया था । और मोदी जी से बहुत आशाये लगाये हुए हैं कि कब pok को पाकिस्तान से आजाद कराया जाये। परन्तु इस भाषण का भी पाकिस्तान पर कोई असर नही पड़ा और pok में बर्बरता अभी भी चल रही है। वहाँ के लोग हर दिन मोत का शिकार हो रहे। वहाँ के लोग भी नही चाहते है कि हम पाकिस्तान में शामिल हो । हर आये दिन वहाँ पर आतंक गतिविधिया होती रहती हैं।
आतंकवाद हर दिन ताक में लगे रहते है कि कैसे भारत की सीमा में घुसा जाये परंतु जब से मोदी सरकार देश में आयी है। तब से इंडियन आर्मी को खुली छूट मिली है जैसे ही कोई भारत के लाइन ऑफ़ कंट्रोल में छेड़ छाड़ या उसे पार करने की कोशिस करे तो उसे सीधे मोत के घाट उतार दिया जाये। हालहि में एक रिपोर्ट आयी है कि पिछले दस सालों के मुकाबले जब से मोदी सरकार आयी है । तब से वहाँ पर सबसे ज्यादा आतंकवादियों को मारा गया हैं। तथा 2017 में तो यह आंकड़ा 110 से उपर चला गया है । इससे यह देखा जा सकता है कि पिछली सरकारों में मुकाबले मोदी सरकार आतंवाद का सफाया करने में सफल रही है। तथा हालहि में मोदी सरकार के उपराष्ट्रपति के उमिद्द्वार ने भी पाकिस्तान को चेताया है कि pok भारत का अभिन्न अंग है और उसे वो वापस ले के रहेगे।
आतंकवाद हर दिन ताक में लगे रहते है कि कैसे भारत की सीमा में घुसा जाये परंतु जब से मोदी सरकार देश में आयी है। तब से इंडियन आर्मी को खुली छूट मिली है जैसे ही कोई भारत के लाइन ऑफ़ कंट्रोल में छेड़ छाड़ या उसे पार करने की कोशिस करे तो उसे सीधे मोत के घाट उतार दिया जाये। हालहि में एक रिपोर्ट आयी है कि पिछले दस सालों के मुकाबले जब से मोदी सरकार आयी है । तब से वहाँ पर सबसे ज्यादा आतंकवादियों को मारा गया हैं। तथा 2017 में तो यह आंकड़ा 110 से उपर चला गया है । इससे यह देखा जा सकता है कि पिछली सरकारों में मुकाबले मोदी सरकार आतंवाद का सफाया करने में सफल रही है। तथा हालहि में मोदी सरकार के उपराष्ट्रपति के उमिद्द्वार ने भी पाकिस्तान को चेताया है कि pok भारत का अभिन्न अंग है और उसे वो वापस ले के रहेगे।
Sunday, 21 May 2017
बाबा पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल
पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू से 3 किलोमीटर दूर देवपाटन गांव में बागमती नदी के किनारे स्थित है। यह एक हिंदू मंदिर है जो पशुपतिनाथ का मुख्य निवास स्थान माना जाता है,
पशुपतिनाथ में सिर्फ हिंदुओ को ही मंदिर परिवेश में जाने की अनुमति है, गैर हिन्दुओ को जो की यह पर घूमने आते है उन्हें बागमती नदी के किनारे से ही यह के दर्शन करने होते है। उन्हें मंदिर परिवेश में जाने की अनुमति नही होती है। यहाँ पर शिवरात्रि पर बहुत बहुत बड़ा मेला लगता है और लोग दर्शन करने के लिए दूर -दूर से यह पर आते हैं। यह नेपाल में शिवजी का सबसे पवित्र मंदिर माना जाता है। यह कहा जाता है जो भी यहा सच्चे मन से भगवान के दर्शन करता है तो उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है, और सबसे बड़ी बात तो यह है कि यहा या के ऐसा लगता है जैसे मनो आप 14वी सदी में आ गये है वही पुराने मकान सब वैसा ही है परंतु अब पहले से ज्यादा भीड़ के कारण यहा पर भी लोगो ने गंदगी फेलाना सुरु क्र दिया है, जिससे यह के वातावरण में बहुत परिवर्तन आ गए हैं। यह से सैलानी तथा शिवभक्त माउन्ट एवेरेस्ट का दीदार करते हैं।
इतिहास एवं किवदंतियाँ
इतिहास के अनुसार माने तो इस मंदिर का निर्माण सोमदेव राजवंश के पशुप्रेक्ष तीसरी सदी में कराया था। माना जाता है कि नेपाल में स्थित ज्योर्तिलिंग द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इस ज्योतिर्लिंग को पशुपतिनाथ ज्योतिर्लिंगके नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार यह ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का हिस्सा है।पशुपतिनाथ के विषय में कथा है कि महाभारत युद्घ में पाण्डवों द्वारा अपने गुरूओं एवं सगे-संबंधियों का वध किये जाने से भगवान भोलेनाथ पाण्डवों से नाराज हो गये।भगवान श्री कृष्ण के कहने पर पाण्डव शिव जी को मनाने चल पड़े। गुप्त काशी में पाण्डवों को देखकर भगवान शिव वहां से विलीन हो गये और उस स्थान पर पहुंच गये जहां पर वर्तमान में केदारनाथ स्थिति है। शिव जी का पीछा करते हुए पाण्डव केदारनाथ पहुंच गये। इस स्थान पर पाण्डवों को आते हुए देखकर भगवान शिव ने एक भैंसे का रूप धारण किया और इस क्षेत्र में चर रहे भैसों के झुण्ड में शामिल हो गये। पाण्डवों ने भैसों के झुण्ड में भी शिव जी को नही पहचान पाये और वो शिवजी को ढूढ़ते रहे जब उन्हें शिवजी नही मिले तो भीम एक पहाड़ के ऊपर खड़े हो गये जैसे ही रात होने लगी सारे भैसें भीम के टांगों के नीचे से घर को निकले लगे परतु शिवजी तो भगवान थे वो ऐसा नही कर सकते थे, ये सब देखकर वो झुंड से दूर होने लगे तभी पांडवो ने उनको पहचान लिया तब शिव जी भैंस के रूप में ही भूमि समाने लगे। भीम ने भैंस को कसकर पकड़ लिया। भगवान शिव प्रकट हुए और पाण्डवों को पापों से मुक्त कर दिया।इसेभीपढ़े: इस हनुमान मंदिर के सामने खुद ही रुक जाती हैं ट्रेन, हादसे में बची थी सबकी जानइस बीच भैंस बने शिव जी का सिर काठमांडू स्थित पशुपति नाथ में पहुंच गया। इसलिए केदारनाथ और पशुपतिनाथ को मिलाकर एक ज्योर्तिलिंग भी कहा जाता है। पशुपतिनाथ में भैंस के सिर और केदारनाथ में भैंस के पीठ रूप में शिवलिंग की पूजा होती है।पशुपतिनाथ के विषय में मान्यता है कि जो व्यक्ति पशुपति नाथ के दर्शन करता है उसका जन्म कभी भी पशु योनी में नहीं होता है। जनश्रुति यह भी है कि, इस मंदिर में दर्शन के लिए जाते समय भक्तों को मंदिर केबाहर स्थित नंदी का प्रथम दर्शन नहीं करना चाहिए। जो व्यक्ति पहले नंदी का दर्शन करता है बाद में शिवलिंग का दर्शन करता है उसे अगले जन्म पशु योनी मिलती है।पशुपतिनाथ ज्योर्लिंग चतुर्मुखी है। इस ज्योतिर्लिंग के विषय में जनश्रुति है इसमें पारस पत्थर के गुण हैं जो लोहे को सोना बना सकता है। नेपाल वासियों और नेपाल के राजपरिवार के लिए पशुपतिनाथ ज्योतिर्लिंग आराध्य देव रहे हैं।
Wednesday, 17 May 2017
लाटू देवता मंदिर (उत्तराखंड का पांचवा धाम)
लाटू देवता का भव्य मंदिर वांण में हैं जो की देवाल से लगभग 30 किलोमीटर दूर उत्तराखंड राज्य में स्थित है। राज्य की राजधानी से यह लगभग 350 किलोमीटर तथा देश की राजधानी से लगभग 530 किलोमीटर दूर हैं। यह भव्य मंदिर एक प्राकृतिक क्षेत्र में स्थित हैं ।जहाँ से हिमालय के भी अलौकिक दर्शन होते हैं। यहाँ जो भी आता हैं मानो उसे ऐसा लगता है जैसे स्वर्ग में आ गए हो। सुबह सूर्योदय का दृश्य तो सब का मन मोह लेता हैं और ऐसी मान्यता है कि जो भी यहां पर आकर लाटू देवता की मन से पूजा करता है उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती हैं।
इतिहास (पौराणिक कथाएँ)
उत्तराखंड में एक देवता ऐसे हैं जो युगों से कैदखाने में बंद हैं। कैदखाना ही इनका मंदिर है। साल में सिर्फ एक बार वैशाख पूर्णिमा को कुछ घंटों के लिए मंदिर का द्वार खुलता है। यह एक मात्र ऐसे देवता हैं जिनके दर्शन पुजारी भी नहीं कर पाते हैं। क्योंकि मंदिर का द्वार खोलते समय पुजारी के आंखों पर पट्टी बंधी होती है। रिश्ते में यह देवता भगवान शिव के साले और माता पार्वती के भाई हैं। लेकिन एक गलती के कारण देवी पार्वती ने इन्हें कैद में डाल दिया और तब से यह कैद में रहते हैं। इस देवता का नाम है लाटू देवता। इस देवता का मंदिर नंदा देवी यात्रा के मार्ग में वांण क्षेत्र में है। लाटू देवता के विषय में ऐसी कथा है कि देवी पार्वती के साथ जब भगवान शिव का विवाह हुआ तो पार्वती जिसे नंदा देवी नाम से भी जाना जाता है। इन्हें विदा करने के लिए सभी भाई कैलाश की ओर चल पड़े। इसमें चचेरे भाई लाटू भी शामिल थे। मार्ग में लाटू को इतनी प्यास लगी कि पानी के लिए इधर-उधर भटकने लगे। इस बीच लाटू देवता को एक घर दिखा और पानी की तलाश में घर के अंदर पहुंच गए। घर का मालिक बुजुर्ग था। बुजुर्ग ने लाटू देवता से कहा कि कोने में मटका है पानी पी लो।संयोग से वहां दो मटके रखे थे। लाटू देवता ने एक मटके को उठाया और पूरा का पूरा मटका खाली कर दिया। प्यास के कारण लाटू समझ नहीं पाए कि जिसे वह पानी समझकर पी गए वह पानी नहीं मदिरा था।कुछ देर में मदिरा ने असर दिखाना शुरु कर दिया और लाटू देवता नशे में उत्पात मचाने लगे। इसे देखकर देवी पार्वती क्रोधित हो गई और लाटू को कैद में डाल दिया। पार्वती ने आदेश दिया कि इन्हें हमेशा कैद में ही रखा जाए। माना जाता है कि कैदखाने में लाटू देवता एक विशाल सांप के रुप में विराजमान रहते हैं। इन्हें देखकर पुजारी डर न जाएं इसलिए यह आंखों पर पट्टी बांधकर मंदिर का द्वार खोलते हैं।वांण क्षेत्र में लाटू देवता के प्रति लोगों में बड़ी श्रद्धा है। लोग अपनी मनोकामना लेकर लाटू के मंदिर में आते हैं। कहते हैं यहां से मांगी मनोकामना जरुर पूरी होती है।
जय लाटू देवता
Wednesday, 3 May 2017
पाकिस्तान की नापाक हरकते
आये दिन हम देख रहे की पाकिस्तान के तरफ से कोई ना कोई घिनोनी हरकते होती रहती है। लगभग हर दिन सींज फायर का उलंघन होता है। जिससे जम्मू कश्मीर के लोगो को काफी नुकसान भुगतना पड़ता हैं। कई लोग बिना कारण के मारे जाते। जिनका इससे कोई लेना देना नही होता है। परंतु पाकिस्तान को इससे कोई फर्क नही पड़ता उसको तो घाटी को दहलाने में ही अच्छा लगता हैं।
में कुछ दिन पहले न्यूज़ देख रहा था तो उसमें दिखाया जा रहा था कि स्कूल के बच्चे इंडियन आर्मी पर पेट्रोल बोम, पत्थर अदि फेंक रहे थे इससे ये महसूस होता है की जो लोग ऐसे काम करते है। उनका देश के प्रति कोई लगाव या कोई प्यार नही है। उनको बस ये नापाक हरकते आती हैं। और इस सब के पीछे पाकिस्तान का ही हाथ हैं , वही से इन लोगो को फंडिंग होती हैं। मात्र कुछ पेसो के लिये ये लोग जिन्हें बच्चे कहा जाता है देश की आर्मी को परेशान करते हैं।
हालही में एक वीडियो आया है, जिसमे चुनाव के दौरान ड्यूटी पर लगे crpf के जवान को कुछ लोग मारते हुए नजर आ रहे हैं परंतु इसके बावजूद भी उस जवान ने पलट कर वॉर नही किया जबकि उसके हाथ में गन थी। में उस हीरो को सेल्यूट करता हूँ जिसने इतना जुर्म होने के बाद भी पलटवार नही किया, परंतु इस घटना के बाद इस पर कोई करवाई नही हुए। बीजेपी ने बोला की हम इस घटना की कड़ी निदा करते हैं। बस इन लोगो से निंदा ही होती है । और कांग्रेस् का तो क्या कहना उसका तो भगवान ही मालिक हैं ।
इस सब को छोड़ के में अब असली मुदे पे आता हूँ दो दिन पहले पकिस्तान की फौज मलगभग 250 मीटर इंडियन बॉर्डर के अंदर गुस गयी थी। जिससे बॉर्डर पर माहौल बिगड़ गया और पाकिस्तान फौज ने भारत के जवानों पर घात लगा कर हमला करने की कोशिस् जिसमे वो नाकामयाब रहे परन्तु दो भारतीय जवान उनकी चुगल में फस गये और पाकिस्तानी आर्मी ने द्वारा उनका सर कलम कर दिया गया और उनके शवो के साथ बरबरता भी की गयी। जिसकी पूरा देश कड़ी निंदा कर रहा हैं। देश जानना चाहता की कब तक ऐसी घटना होती रहेगी। अब पूरा देश एक ही चीज चाहता है की इसका बदला लिया जाये और बदला ऐसा लिया जाना चाहिए की पाकिस्तान दोबारा ऐसी हरकत करने से पहले दस बार सोचे।
में सरकार से एक ही गुजारिस करता हूं कि अब कड़ी निंदा करने का समय नही है इसके ऊपर एक्शन होना चाहिए।
जय हिंद।
भारत माता की जय।
में कुछ दिन पहले न्यूज़ देख रहा था तो उसमें दिखाया जा रहा था कि स्कूल के बच्चे इंडियन आर्मी पर पेट्रोल बोम, पत्थर अदि फेंक रहे थे इससे ये महसूस होता है की जो लोग ऐसे काम करते है। उनका देश के प्रति कोई लगाव या कोई प्यार नही है। उनको बस ये नापाक हरकते आती हैं। और इस सब के पीछे पाकिस्तान का ही हाथ हैं , वही से इन लोगो को फंडिंग होती हैं। मात्र कुछ पेसो के लिये ये लोग जिन्हें बच्चे कहा जाता है देश की आर्मी को परेशान करते हैं।
हालही में एक वीडियो आया है, जिसमे चुनाव के दौरान ड्यूटी पर लगे crpf के जवान को कुछ लोग मारते हुए नजर आ रहे हैं परंतु इसके बावजूद भी उस जवान ने पलट कर वॉर नही किया जबकि उसके हाथ में गन थी। में उस हीरो को सेल्यूट करता हूँ जिसने इतना जुर्म होने के बाद भी पलटवार नही किया, परंतु इस घटना के बाद इस पर कोई करवाई नही हुए। बीजेपी ने बोला की हम इस घटना की कड़ी निदा करते हैं। बस इन लोगो से निंदा ही होती है । और कांग्रेस् का तो क्या कहना उसका तो भगवान ही मालिक हैं ।
इस सब को छोड़ के में अब असली मुदे पे आता हूँ दो दिन पहले पकिस्तान की फौज मलगभग 250 मीटर इंडियन बॉर्डर के अंदर गुस गयी थी। जिससे बॉर्डर पर माहौल बिगड़ गया और पाकिस्तान फौज ने भारत के जवानों पर घात लगा कर हमला करने की कोशिस् जिसमे वो नाकामयाब रहे परन्तु दो भारतीय जवान उनकी चुगल में फस गये और पाकिस्तानी आर्मी ने द्वारा उनका सर कलम कर दिया गया और उनके शवो के साथ बरबरता भी की गयी। जिसकी पूरा देश कड़ी निंदा कर रहा हैं। देश जानना चाहता की कब तक ऐसी घटना होती रहेगी। अब पूरा देश एक ही चीज चाहता है की इसका बदला लिया जाये और बदला ऐसा लिया जाना चाहिए की पाकिस्तान दोबारा ऐसी हरकत करने से पहले दस बार सोचे।
में सरकार से एक ही गुजारिस करता हूं कि अब कड़ी निंदा करने का समय नही है इसके ऊपर एक्शन होना चाहिए।
जय हिंद।
भारत माता की जय।
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